चाईबासा, 19 अगस्त 2026। पश्चिमी सिंहभूम जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बुधवार को सदर चाईबासा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत नरसंडा पंचायत के नरसंडा गांव में टीबी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को क्षय रोग यानी टीबी के लक्षण, बचाव, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन नरसंडा पंचायत के मुखिया राम सुंडी की अध्यक्षता में किया गया। इस दौरान ग्रामीणों और उपस्थित लोगों को टीबी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
टीबी के लक्षण और समय पर जांच की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान ओम प्रकाश ठाकुर, PPM और अगस्ती चन्द्र प्रधान ने ग्रामीणों को टीबी के लक्षण, इससे बचाव, जांच की प्रक्रिया और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के संभावित लक्षण दिखाई देने पर बीमारी को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं। साथ ही चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से उपचार पूरा करने के महत्व को भी समझाया गया।
3 टीबी मरीजों को NCC कैडेट्स ने दिया सहयोग
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा टीबी से प्रभावित मरीजों को सामाजिक और मानसिक स्तर पर सहयोग देना भी रहा। NCC कैडेट्स के कोऑर्डिनेटर सुदीप कुमार आचार्य के नेतृत्व में NCC के छात्र-छात्राओं ने टीबी से प्रभावित तीन मरीजों को मनो-सामाजिक सहायता प्रदान की।
NCC कैडेट्स ने मरीजों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें नियमित रूप से अपना उपचार जारी रखने के लिए प्रेरित किया। साथ ही टीबी को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों और सामाजिक संकोच से दूर रहने का संदेश भी दिया गया।
टीबी के खिलाफ जागरूकता में समुदाय की भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को यह संदेश दिया गया कि टीबी की रोकथाम और इसके उन्मूलन के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की भागीदारी जरूरी है।
लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक रहने, समय पर जांच कराने और उपचार को बीच में न छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के जरिए टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
नोट: यह खबर पश्चिमी सिंहभूम जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, चाईबासा की प्रेस विज्ञप्ति संख्या 1154/2026, दिनांक 19 अगस्त 2026 में उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।


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