![]() |
काठमांडू, 21 अगस्त 2026: नेपाल में संभावित ‘सुपर अल नीनो’ के प्रभावों को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज करने पर जोर दिया है। ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने कहा कि संभावित मौसम परिवर्तन के असर से निपटने के लिए पानी, खाद्य सुरक्षा, सिंचाई, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में पहले से तैयारी करना जरूरी है।
मंत्री श्रेष्ठ ने काठमांडू में आयोजित ‘Super El Niño and Climate Risk: Impacts on Water, Food, Energy, and Disaster Resilience’ विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान यह बात कही। उन्होंने संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए समय रहते ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बताई।
बारिश और तापमान में बदलाव की चिंता
अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु घटना है, जिसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। नेपाल के लिए इसके संभावित प्रभावों में बारिश के पैटर्न, तापमान और जल उपलब्धता में बदलाव को लेकर चिंता जताई जा रही है।
नेपाल के जल तथा मौसम विभाग की मौजूदा निगरानी व्यवस्था में मौसम, वर्षा और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग की वेबसाइट पर मौसम और बाढ़ संबंधी चेतावनियां तथा नदी जलस्तर की निगरानी उपलब्ध है।
हाइड्रोपावर पर भी पड़ सकता है असर
नेपाल की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा व्यवस्था में जलविद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बारिश में संभावित बदलाव का सीधा असर हाइड्रोपावर उत्पादन पर पड़ सकता है। मंत्री ने इसी वजह से जल संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में जोखिम को ध्यान में रखकर तैयारी करने पर बल दिया।
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मौजूदा आंकड़े भी देश की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत की बड़ी हिस्सेदारी को दर्शाते हैं।
खाद्य और सिंचाई व्यवस्था पर भी नजर
अल नीनो के संभावित प्रभावों को केवल मौसम तक सीमित नहीं माना जा रहा है। बारिश और तापमान में बदलाव होने पर कृषि उत्पादन, सिंचाई व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी कारण नेपाल सरकार पानी के साथ-साथ खाद्य और सिंचाई क्षेत्र में भी पहले से रणनीति तैयार करने पर जोर दे रही है।
नेपाल के जल एवं मौसम विभाग की मौसमी पूर्वानुमान व्यवस्था में मानसून सहित विभिन्न मौसमी परिस्थितियों पर नियमित निगरानी की जाती है।
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत
नेपाल की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बाढ़, भूस्खलन और अन्य जलवायु संबंधी आपदाओं का जोखिम पहले से मौजूद है। ऐसे में संभावित जलवायु बदलाव के प्रभावों को देखते हुए आपदा-रोधी ढांचे और स्थानीय स्तर पर तैयारी को मजबूत करना अहम माना जा रहा है।
मंत्री श्रेष्ठ का संदेश साफ है कि संभावित ‘सुपर अल नीनो’ के प्रभाव सामने आने का इंतजार करने के बजाय पानी, भोजन, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन—चारों मोर्चों पर पहले से तैयारी की जाए।
महत्वपूर्ण: ‘सुपर अल नीनो’ के संभावित प्रभावों को लेकर पूर्वानुमान अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी संभावित प्रभाव को निश्चित घटना के रूप में नहीं, बल्कि मौसम संबंधी जोखिम के रूप में देखना उचित है।
स्रोत: नेपाल के ऊर्जा मंत्री के बयान, नेपाल के जल तथा मौसम विभाग और उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के आधार पर।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें