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रविवार, 12 जुलाई 2026

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद के बाद पुजारियों के लिए 'बिना जेब' ड्रेस कोड पर छिड़ी बहस, संतों ने रखी अलग-अलग राय

 


अयोध्या/हरिद्वार | 12 जुलाई 2026

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले के बाद देशभर में मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इसी बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज द्वारा मंदिरों के पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते (Pocketless Dress Code) का सुझाव दिए जाने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर संत समाज और धार्मिक संगठनों के बीच अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ लोग इसे पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कई धर्माचार्यों का कहना है कि कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे पुजारी समाज पर संदेह करना उचित नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

हाल के दिनों में अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की खबरों के बाद मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। इसी दौरान मध्य प्रदेश के आगर-मालवा स्थित बगलामुखी मंदिर में दान राशि में कथित गड़बड़ी की शिकायत भी सामने आई।

इन घटनाओं के बाद महंत रवींद्र पुरी ने सुझाव दिया कि मंदिरों में सेवा देने वाले पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते का ड्रेस कोड लागू किया जाए। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

मनसा देवी मंदिर में लागू हुआ नया ड्रेस कोड

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर प्रशासन ने इस दिशा में कदम उठाते हुए घोषणा की कि मंदिर में पूजा कराने वाले पुजारी अब बिना जेब वाले कुर्तेपहनेंगे।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।

मेटल डिटेक्टर और सुरक्षा जांच का भी सुझाव

महंत रवींद्र पुरी ने केवल ड्रेस कोड ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए—

  • मेटल डिटेक्टर से जांच,
  • प्रवेश और निकास की निगरानी,
  • दान व्यवस्था में पारदर्शिता,

जैसे उपायों पर भी विचार करने की बात कही है।

संत समाज में मतभेद

इस प्रस्ताव पर संत समाज के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

धर्मगुरु अमन गिरि महाराज की राय

धर्मगुरु अमन गिरि महाराज ने कहा कि देश और दुनिया के हजारों मंदिर वर्षों से पुजारियों और ब्राह्मणों की ईमानदारी के कारण सुचारु रूप से संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे पुजारी समाज की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

महाराज माधव का बयान

महाराज माधव ने भी कहा कि ब्राह्मण समाज सदैव सेवा भाव से कार्य करता है और पारिश्रमिक लेकर धार्मिक कर्तव्यों का निर्वहन करता है।

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों के आधार पर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं माना जा सकता।

बहस का केंद्र बना 'बिना जेब वाला कुर्ता'

ड्रेस कोड को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी पुजारी की ईमानदारी का आकलन उसके वस्त्रों के आधार पर किया जा सकता है?

कई धार्मिक विद्वानों का मानना है कि यदि कहीं वित्तीय अनियमितता होती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, किसी एक घटना के आधार पर सभी पुजारियों को संदेह की दृष्टि से देखना उचित नहीं होगा।

मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता पर जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिरों में दान और वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए—

  • डिजिटल लेखा-जोखा,
  • सीसीटीवी निगरानी,
  • नियमित ऑडिट,
  • स्वतंत्र निगरानी तंत्र,

जैसे उपाय अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

आधिकारिक स्थिति

अब तक किसी केंद्रीय एजेंसी या सरकार की ओर से देशभर के मंदिरों में पुजारियों के लिए बिना जेब वाले ड्रेस कोड को अनिवार्य बनाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। फिलहाल यह कुछ मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं द्वारा अपनाए गए प्रशासनिक निर्णयों तथा सुझावों तक सीमित है।


मुख्य बातें (Highlights)

  • अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दान विवाद के बाद नया विवाद चर्चा में।
  • महंत रवींद्र पुरी ने पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते का सुझाव दिया।
  • हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में बिना जेब वाला ड्रेस कोड लागू।
  • सुरक्षा के लिए मेटल डिटेक्टर और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की भी सलाह।
  • कई संतों ने पूरे पुजारी समाज पर संदेह जताने का विरोध किया।
  • देशभर में इस प्रस्ताव को लेकर धार्मिक और सामाजिक बहस जारी।
  • देशव्यापी स्तर पर ऐसा कोई सरकारी अनिवार्य आदेश फिलहाल जारी नहीं हुआ है।

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