बोकारो,14 जुलाई 2026
बोकारो में मासूम के साथ यौन उत्पीड़न की घटना से सनसनी
झारखंड के बोकारो जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां 7 वर्षीय एक बालक के साथ कथित तौर पर दो किशोर लड़कों द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है।
यह घटना 14 जुलाई 2026 को सामने आई, जब पीड़ित की मां ने पुलिस को घटना की जानकारी दी।
आम तोड़ने गया था बच्चा, सुनसान जगह ले जाकर किया हमला
पुलिस के अनुसार, पीड़ित बच्चा गांव के पास आम तोड़ने गया था। आरोप है कि उसी गांव के दो लड़कों ने उसे पकड़ लिया और जबरन एक सुनसान स्थान पर ले गए।
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने बच्चे को रस्सी से बांध दिया और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। घटना के बाद आरोपियों ने कथित रूप से बच्चे को किसी को भी घटना के बारे में बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
डर और सदमे के कारण नहीं बता पाया घटना
कसमार थाना के प्रभारी कुंदर कुमार ने बताया कि बच्चा इस घटना से बुरी तरह डर गया था। इसी कारण उसने तत्काल किसी को कुछ नहीं बताया।
हालांकि घटना के बाद बच्चे को लगातार दर्द की शिकायत रही और वह स्कूल जाने से भी इनकार करने लगा। जब उसकी मां ने कारण पूछा तो उसने पूरी घटना बताई।
इसके बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने जांच शुरू की
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रारंभ कर दी है। अधिकारियों के अनुसार:
- पीड़ित का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जा रहा है।
- आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
- उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- मामले की जांच बाल संरक्षण कानूनों के तहत की जा रही है।
पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे, जैसे—
- स्कूल जाने से इनकार करना,
- लगातार डर या तनाव में रहना,
- शारीरिक दर्द की शिकायत करना,
- अचानक चुप हो जाना,
तो अभिभावकों को संवेदनशीलता के साथ बच्चे से बात करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बच्चों से जुड़े किसी भी अपराध की जानकारी छिपाने के बजाय तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और पीड़ित को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

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