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गुरुवार, 20 अगस्त 2026

हिमालय की जल संकट की कहानी अब वेनिस तक, शॉर्ट फिल्म ‘द लास्ट ड्रॉप’ की खास उपलब्धि

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 शिमला, 19 अगस्त 2026: 

हिमालय में तेजी से बदलते पर्यावरण, ग्लेशियरों के पिघलने और जल संकट जैसे गंभीर मुद्दों को कहानी के जरिए सामने लाने वाली शॉर्ट फिल्म ‘द लास्ट ड्रॉप’ एक बार फिर चर्चा में है। फिल्म के निर्माताओं के अनुसार, इसे वेनिस प्रोडक्शन ब्रिज में मार्केट स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। यह आयोजन वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के साथ होने वाले प्रमुख फिल्म इंडस्ट्री कार्यक्रमों में शामिल है।

फिल्म को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ‘द लास्ट ड्रॉप’ का निर्देशन राजीव ठाकुर ने किया है। फिल्म में अरुणोदय शर्मा और ईशा शर्मा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी पश्चिमी हिमालय की पृष्ठभूमि में पर्यावरण और पानी से जुड़े सवालों को सामने लाती है।

हिमालय की खूबसूरती के पीछे छिपा संकट

‘द लास्ट ड्रॉप’ की कहानी दो भाई-बहन की यात्रा के इर्द-गिर्द घूमती है। पश्चिमी हिमालय से गुजरते हुए उन्हें इस क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी और पानी के बढ़ते संकट का सामना करना पड़ता है।

फिल्म की खासियत यह है कि यह जलवायु परिवर्तन को केवल आंकड़ों या वैज्ञानिक तथ्यों के रूप में नहीं दिखाती, बल्कि इसे मानवीय कहानी से जोड़ने की कोशिश करती है।

क्या है ‘वर्चुअल वॉटर’?

फिल्म का एक महत्वपूर्ण विषय ‘वर्चुअल वॉटर’ है। इसका अर्थ उस पानी से है, जो किसी वस्तु या खाद्य पदार्थ के उत्पादन और उसे उपभोक्ता तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल होता है।

फिल्म इसी अवधारणा को हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव से जोड़ती है। फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि इसका उद्देश्य लोगों को अपने उपभोग के तरीकों और पर्यावरण पर उनके प्रभाव के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करना है। 

पहले भी मिल चुकी है पहचान

‘द लास्ट ड्रॉप’ इससे पहले भी कई फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हो चुकी है। फिल्म की आधिकारिक फिल्म प्रोफाइल के मुताबिक, इसे शिमला और अन्य फिल्म समारोहों में आधिकारिक चयन मिला है। फिल्म ने कुछ अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पुरस्कार भी हासिल किए हैं। 

फिल्म की अवधि करीब 25 से 28 मिनट के बीच बताई गई है और इसकी शूटिंग हिमाचल प्रदेश तथा पश्चिमी हिमालय के क्षेत्रों में की गई है। 

जलवायु परिवर्तन पर बढ़ती चिंता

फिल्म की कहानी ऐसे समय में सामने आ रही है, जब हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों, जल स्रोतों और पर्यावरणीय बदलावों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी ‘द लास्ट ड्रॉप’ की विशेष स्क्रीनिंग देखी थी और फिल्म के जरिए जलवायु संबंधी जागरूकता बढ़ाने के प्रयास की सराहना की थी। 

क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?

अगर वेनिस प्रोडक्शन ब्रिज में फिल्म की मार्केट स्क्रीनिंग की पुष्टि आधिकारिक कार्यक्रम सूची से भी होती है, तो यह हिमालय और भारत के जल संकट जैसे स्थानीय मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय फिल्म उद्योग के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

‘द लास्ट ड्रॉप’ की कहानी आखिरकार एक बेहद अहम सवाल छोड़ती है—अगर हिमालय की बर्फ और पानी लगातार कम होते गए, तो आने वाली पीढ़ियों के हिस्से में कितना पानी बचेगा?

यही सवाल इस शॉर्ट फिल्म को महज एक कहानी नहीं, बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण पर बातचीत का माध्यम बनाता है।

नोट: उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में फिल्म के निर्देशन, कलाकारों, विषय और पूर्व फिल्म समारोहों में चयन की पुष्टि मिलती है। वेनिस प्रोडक्शन ब्रिज की 2026 मार्केट स्क्रीनिंग के संबंध में ऊपर का दावा फिल्म निर्माताओं की घोषणा के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। 

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