रांची | 4 जुलाई 2026
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes - NCST) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा सोमवार को रांची स्थित न्यू सर्किट हाउस (सर्कुलर रोड) में झारखंड के रांची, हजारीबाग और जामताड़ा जिलों से जुड़े कुल 14 महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करेंगी। इन मामलों में आदिवासी भूमि, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार, सरना स्थल, आंगनबाड़ी, खतियान भूमि और जनजातीय अधिकारों से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।
आयोग के समक्ष प्रस्तुत इन मामलों में शिकायतकर्ताओं द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के अधिकारों के संरक्षण, भूमि विवादों के समाधान तथा प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई है।
रिम्स-2 निर्माण को लेकर शिकायत पर होगी सुनवाई
सुनवाई के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में रांची जिले के कांके प्रखंड के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान द्वितीय परिसर)का मामला शामिल है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा उपजाऊ कृषि भूमि पर रिम्स-2 निर्माण की योजना बनाई गई है। आयोग से मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर ग्रामीणों के हितों की रक्षा की जाए तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
आदिवासी भूमि से जुड़े कई मामलों पर होगी सुनवाई
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग निम्नलिखित मामलों की भी सुनवाई करेगा—
रांची जिला
- टाटीसिलवे में आदिवासी भूमि पर कथित अतिक्रमण।
- रांची शहरी क्षेत्र में आदिवासी खतियान, बकाश्त, भुइहरी एवं मुंडारी भूमि का गैर-आदिवासियों के नाम पर कथित हस्तांतरण एवं बंदोबस्ती।
- बेड़ो थाना क्षेत्र में सरना पूजा स्थल की भूमि की कथित अवैध बिक्री।
- नामकुम क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति लोहरा समाज की खतियान भूमि की कथित अवैध बिक्री।
- ओरमांझी में पुश्तैनी खतियान भूमि पर कथित अवैध कब्जा।
पलामू और गढ़वा
- पलामू में आंगनबाड़ी केंद्र-3 को हटाकर केंद्र-2 में जोड़ने से संबंधित शिकायत।
- गढ़वा जिले में आदिवासी खतियान भूमि पर कथित गैर-आदिवासी कब्जे का मामला।
- खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के सेवानिवृत्त लिपिक के बकाया वेतन एवं अन्य देयों का भुगतान नहीं होने की शिकायत।
जामताड़ा
जामताड़ा जिले में—
- वर्ष 1932 के खतियान में पुरातन पतित भूमि पर कथित अवैध कब्जा।
- आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य लंबित रहने का मामला।
- विभिन्न जनजातीय गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और सामाजिक समस्याओं से संबंधित शिकायतें।
हजारीबाग
हजारीबाग जिले से जुड़े मामलों में आरोप लगाया गया है कि—
- विभिन्न खातों एवं प्लॉटों की भूमि कर्णपुरा माइनिंग सिंडिकेट, NCDC, CCL तथा आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा अधिग्रहित किए जाने के बावजूद कई रैयतों को अब तक उचित मुआवजा और रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया है।
आयोग इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब तलब कर सकता है।
क्या है राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)?
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा, उनके सामाजिक-आर्थिक विकास तथा उनसे संबंधित शिकायतों की जांच के लिए किया गया है। आयोग विभिन्न मामलों में राज्य सरकारों और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांग सकता है तथा आवश्यक सिफारिशें भी जारी कर सकता है।
📌 सुनवाई के प्रमुख मुद्दे
- नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 निर्माण
- आदिवासी खतियान भूमि विवाद
- सरना पूजा भूमि की कथित अवैध बिक्री
- मुआवजा एवं रोजगार संबंधी शिकायतें
- आंगनबाड़ी भवन निर्माण
- जनजातीय गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
- गैर-आदिवासियों द्वारा कथित भूमि कब्जा
निष्कर्ष
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा द्वारा की जाने वाली यह सुनवाई झारखंड के आदिवासी समुदाय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों के समाधान की दिशा में अहम मानी जा रही है। विशेष रूप से भूमि अधिकार, मुआवजा, रोजगार और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर आयोग की कार्रवाई से प्रभावित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सुनवाई के बाद आयोग आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों और प्रशासन को निर्देश या सिफारिशें जारी कर सकता है।

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