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ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (Shree Jagannath Temple Administration - SJTA) और इस्कॉन (ISKCON)के बीच रथ यात्रा की तिथि को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मंगलवार को मंदिर प्रशासन की एक समिति ने ISKCON के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अलग-अलग दिनों में रथ यात्रा आयोजित करना शास्त्रों के अनुरूप है।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा निर्धारित धार्मिक तिथि और परंपरा के अनुसार ही आयोजित की जानी चाहिए। मनमाने समय पर रथ यात्रा निकालना शास्त्रसम्मत नहीं माना जा सकता।
SJTA ने ISKCON के बयान को बताया भ्रामक
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 12 जुलाई 2026 को ISKCON के राष्ट्रीय संचार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कई तथ्यात्मक रूप से गलत बातें कही गई हैं।
SJTA के अनुसार, इस प्रकार के दावे श्रद्धालुओं को भ्रमित करने वाले हैं और इससे भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाता है।
प्रशासन ने कहा कि निर्धारित तिथि से अलग रथ यात्रा आयोजित करने को शास्त्रों के अनुरूप बताना उचित नहीं है।
रथ यात्रा की तिथि को लेकर पहले भी रहा है विवाद
पिछले कुछ वर्षों से विदेशों में ISKCON द्वारा विभिन्न तिथियों पर रथ यात्रा और भगवान जगन्नाथ से जुड़े अन्य उत्सव आयोजित करने को लेकर पुरी मंदिर प्रशासन और ISKCON के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।
पुरी मंदिर प्रशासन का कहना है कि रथ यात्रा सहित भगवान जगन्नाथ से जुड़े प्रमुख उत्सव हिंदू पंचांग, परंपराओं और शास्त्रीय नियमों के अनुसार निर्धारित तिथि पर ही आयोजित किए जाने चाहिए।
श्रद्धालुओं से सही जानकारी पर भरोसा करने की अपील
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भगवान जगन्नाथ से संबंधित धार्मिक आयोजनों के बारे में केवल अधिकृत और आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करें।
प्रशासन का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मर्यादाओं का पालन करना सभी संस्थाओं और श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी है।
धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने कहा कि मंदिर की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक रीति-रिवाजों और शास्त्रसम्मत व्यवस्था का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो, उससे बचना आवश्यक है।
फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच वैचारिक मतभेद बने हुए हैं, जबकि श्रद्धालुओं की नजर आगे की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

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