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शनिवार, 4 जुलाई 2026

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 'नमो ग्रीन रेल' को मिली हरी झंडी, हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट



नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026

भारतीय रेलवे ने हरित एवं स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन 'नमो ग्रीन रेल' को हरी झंडी दे दी है। इस परियोजना के साथ भारत हाइड्रोजन तकनीक से रेल संचालन करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। रेलवे का यह महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा के जींद–सोनीपत रेलखंड पर शुरू किया जा रहा है, जहां इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन किया जाएगा। 

यह पहल भारतीय रेलवे के ग्रीन मोबिलिटी मिशन, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

क्या है 'नमो ग्रीन रेल'?

'नमो ग्रीन रेल' भारतीय रेलवे की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित DEMU (Diesel Electric Multiple Unit) ट्रेन है। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया से बिजली उत्पन्न करती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) उत्सर्जित होती है। यही वजह है कि इसे पर्यावरण के अनुकूल और जीरो-टेलपाइप-एमिशन तकनीक माना जाता है। 

जींद–सोनीपत रूट पर होगा संचालन

रेल मंत्रालय के अनुसार, 10 कोच वाली यह ट्रेन हरियाणा के जींद–सोनीपत सेक्शन पर पायलट परियोजना के रूप में चलाई जाएगी। ट्रेन में 1200 किलोवाट क्षमता का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है और इसकी अधिकतम स्वीकृत गति 75 किलोमीटर प्रति घंटाहोगी। 

भारत बना चुनिंदा देशों के क्लब का हिस्सा

इस परियोजना के साथ भारत अब उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिन्होंने हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक को अपनाया है। इनमें जर्मनी, जापान, चीन और स्वीडन जैसे देश पहले से शामिल हैं। भारतीय रेलवे की यह उपलब्धि स्वदेशी तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

क्यों खास है हाइड्रोजन ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं—

  • केवल जलवाष्प का उत्सर्जन
  • कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी
  • कम ध्वनि प्रदूषण
  • स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन
  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी
  • भविष्य की हरित रेलवे तकनीक की दिशा में बड़ा कदम

'विकसित भारत' की दिशा में नई पहल

रेल मंत्रालय का मानना है कि यह परियोजना केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत के 'विकसित भारत 2047', नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य और हरित ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले समय में ऐसे स्वच्छ ईंधन आधारित रेल नेटवर्क का विस्तार अन्य उपयुक्त रेलखंडों पर भी किया जा सकता है। 


📌 हाइलाइट बॉक्स

"एक नए युग की शुरुआत: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन! 🚆🌱

स्वच्छ और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ते हुए भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन 'नमो ग्रीन रेल' को हरी झंडी दे दी है।

**हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट से शुरू हो रहा यह पायलट प्रोजेक्ट भारत को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक रेल परिवहन की दिशा में नई पहचान देगा। यह केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प की एक बड़ी छलांग है।"


भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की प्रमुख विशेषताएं

  • ट्रेन का नाम: नमो ग्रीन रेल
  • तकनीक: हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित DEMU
  • रूट: जींद–सोनीपत (हरियाणा)
  • कोच: 10
  • इंजन क्षमता: 1200 kW हाइड्रोजन फ्यूल सेल
  • अधिकतम गति: 75 किमी/घंटा
  • उत्सर्जन: केवल जलवाष्प
  • उद्देश्य: स्वच्छ, हरित और टिकाऊ रेल परिवहन 

निष्कर्ष

भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 'नमो ग्रीन रेल' देश के परिवहन क्षेत्र में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत को आधुनिक रेल तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी दिलाएगी। यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों का विस्तार किया जा सकता है।

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