झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार, 29 जून 2026 को शिक्षकों को समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उनसे सरकार की "आंख, कान और नाक" बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर झारखंड के करोड़ों लोगों की बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन एक बेहतर समाज का निर्माण तभी संभव है जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पालन करे।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों से शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश घर-घर तक पहुंचाने की अपील की।
"स्कूल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और प्रेरणादायक स्थान होने चाहिए"
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य का प्रत्येक विद्यालय बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित, प्रेरणादायक और सकारात्मक वातावरण वाला स्थान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यालयों का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां हर बच्चा बिना किसी डर, भेदभाव या असुरक्षा के सीख सके और आगे बढ़ सके।
क्रूरता और नफरत फैलाने वाली मानसिकता पर सरकार की सख्ती
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी परिस्थिति में विद्यालयों या समाज में क्रूरता, दुर्व्यवहार, भेदभाव या नफरत फैलाने वाली मानसिकता को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं तो सरकार आवश्यक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों का ज्ञान देना नहीं है, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो संवेदनशील हों, वैज्ञानिक सोच रखते हों और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण हों।
शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों पर भी दिया जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक शिक्षा का लक्ष्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आपसी सम्मान जैसे गुण विकसित करना भी शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे प्रभावशाली माध्यम हैं और उनके प्रयासों से ही राज्य में जागरूक, शिक्षित और सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों से अपील की कि वे केवल शिक्षण कार्य तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी लोगों तक पहुंचेगा जब शिक्षक समाज और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेंगे।
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिक्षकों से सरकार की "आंख, कान और नाक" बनने की अपील की।
दूरदराज़ क्षेत्रों में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सौहार्द फैलाने पर दिया जोर।
कहा—स्कूल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और प्रेरणादायक स्थान होने चाहिए।
किसी भी प्रकार की क्रूरता, दुर्व्यवहार और नफरत फैलाने वाली मानसिकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि संवेदनशील, वैज्ञानिक सोच वाले और मानवीय मूल्यों से युक्त नागरिक तैयार करना है।



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